खिसकते जनाधार से खिसियाने लगी है भाजपा

भाजपा अपने खिसकते जनाधार से बौखला गई है। वैसे भी भाजपा का यही चरित्र सदैव से रहा है। पार्टी कभी भी दलितों पिछड़ों की समर्थक नहीं रही। दलित समर्थकों के लिए इस पार्टी के मन में सदैव ऐसी भावनाएं रही हैं। हमेशा से दलित-पिछड़ा और मुस्लिम विरोध पार्टी के एजेंडे का हिस्सा रहा है। यह बाते कांग्रेस के युवा किसान नेता शिवशंकर साह ने एक बातचीत में कहीं। उन्होंने कहा कि ब्राह्मणवादी मानसिकता वाली यह पार्टी कभी भी नहीं चाहती कि पिछड़ी जातियों में उभार हो। पार्टी का चरित्र तो उसी समय स्पष्‍ट हो गया था, जब दलित पार्टी-अध्यक्ष बंगारू लक्ष्मण को एक षड़यंत्र के तहत इस पार्टी ने बेईमान साबित कर दिया। यह पार्टी की राजनीति का हिस्सा था, जिससे कि भविष्‍य में दलित- आदिवासी के लिए पार्टी के उच्च पदों के रास्ते हमेशा के लिए बंद हो जाएं। ..और हुआ भी यही। इसके बाद से पार्टी की कोई भी नेतृत्वकारी शक्ति दलित- पिछड़े वर्ग के हाथ में नहीं है। उन्होंने कहा कि जहां कुछ दलित समर्थक हैं भी, वहां भी यह पार्टी उन्हें आवाज उठाने नहीं देती है।। दरभंगा से भाजपा संासद हुकुम देव नारायण को पार्टी की इसी मानसिकता के चलते महिला आरक्षण के मुद्दे पर बोलने की इजाज़त नहीं दी गई। उनकी आवाज को दबा दिया गया। श्री साह ने कहा कि यह पार्टी पूरी तरह ब्राह्मणवादी विचार धारा के पोषक सामंती लोगों की पार्टी बनकर रह गई है। बिहार में सी. पी. ठाकुर, उ. प्र. में भूमिहार जाति के शाही को अध्यक्ष बनाया जाना पार्टी की सामंती सोच की कलई खोलता है। भला इस पार्टी के नेताओं से लालू, मुलायम के सम्मान में कुछ कहने की उम्मीद भी कैसे की जा सकती है? इस पार्टी से ऐसे ही बयान अपेक्षित हैं। उन्होंने आगं कहा कि इस पार्टी का यह रुख नया नहीं है। पहले भी इस पार्टी ने सोनिया जी को लेकर ऐसा ही किया था। तब पार्टी के सभी बड़े नेता सोनिया जी के खिलाफ जहर उगलने में लगे थे। लेकिन समय के साथ-साथ सोनिया जी ने अपनी लोकप्रियता और नेतृत्वकुशलता के दम पर खुद को एक सशक्त नेत्री के रूप में स्थापित कर लिया। दूसरी ओर युवा नेता राहुल गांधी भी दलितों-पिछड़ों के लिए लगातार संघर्षरत हैं। इन्हीं कारणों से भाजपा को अपना आधार पूरी तरह से खोता लग रहा है। अपने इसी खोते हुए जनाधार के कारण बौखलाहट में इस पार्टी के नेता ऐसे अनाप-शनाप बयान देने में लगे हैं। जनता ऐसे लोगों को जवाब जरूर देगी।

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