राष्ट्रीय लोकदल ने पूर्वांचल में पाँव पसारा

उत्तर प्रदेश के चुनाव में अभी देर है, बावजूद सभी पार्टियाँ आगामी विधानसभा के चुनाव की तैयारी में जुट गयी हैं। 21 अप्रैल को भाजपा ने दिल्ली में अपना शक्ति प्रदर्शन किया तो 27 अप्रैल को गैर एनडीए और गैर यूपीए 13 दलों के गठबंधन ने भारत बंद का आयोजन कर अपनी मौजूदगी दर्ज की। 13 दलों के इस भारत बंद में सपा और लोकदल के कार्यकर्ताओं ने जगह - जगह कड़ा प्रदर्शन किया, तोड़ - फोड़ की और जन जीवन को अस्त - व्यस्त कर दिया, राष्ट्रीय लोकदल का यद्यपि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बड़ा जनाधार है और इस बंद में लोकदल की भूमिका काफी प्रभावी भी रही। खास बात यह है कि राष्ट्रीय लोकदल ने पूर्वांचल में भी अपनी सांगठनिक ताकत में बढोतरी की। सवाल चाहे किसानों का हो या मंहगाई का, राष्ट्रीय लोकदल पूर्वांचल में अपनी आवाज बुलंद करता रहा है। पूर्वांचल में लोक प्रश्नों को लेकर लड़ने - भिड़ने वाले जुझारू नेता सुरेन्द्र सिंह देहाती ने कहा कि भारत बंद का असर बहुत ही व्यापक रहा। अपने संघर्षों के बल पर पार्टी ने पूर्वांचल में अलग पहचान बनाई है। उन्होंने बताया कि महंगाई की मार आम जनता पर पड़ी है और यह आम जनता सभी पार्टियों की है। पहली दफा जनाक्रोश सड़क पर दिखा। उन्होंने कहा कि राहुल गाँधी का नाटक अब यू.पी. में नहीं चलेगा। गरीबों को उजाड़ने एवं मारने वाली सरकार के नुमाईंदे कथित युवराज पहले अपनी सरकार दुरुस्त करें। गरीबों के घर ठहरकर गरीबों का मजाक उड़ाया जा रहा है। राहुल गाँधी की किसान-विरोधी पार्टी कांग्रेस का चेहरा बेनकाब हो चुका है। किसानों की जमीन लूटने के बाद कांग्रेस अब किसानों की फसल लुटवा रही है। गेहूं का समर्थन मूल्य 1100 रुपये प्रति क्विंटल है, पर किसानों का गेहूं 800 रुपये प्रति क्विंटल पर बिक रहा है पूरे देश के बिचैलिए और व्यापारी औने - पौने दाम पर गेहूं खरीद रहे है। कहीं कोई क्रय केंद्र का दाम नहीं है। किसान तबाह है, मजबूर है। उत्तर प्रदेश का एक - एक किसान कांग्रेस से जवाब मांग रहा है। श्री देहाती ने कहा कि भाजपा और कांग्रेस सांपनाथ और नागनाथ है। महंगाई के मुद्दे पर भाजपा कांग्रेस की आर्थिक नीति की खिलाफत करने के बजाय आर्थिक कुप्रबंधन की बात उठा रही है। यह कांग्रेस की आर्थिक नीति का समर्थन है। भाजपा अगर महंगाई पर लड़ना चाहती है तो पहले वह तय करे कि वह वैश्वीकरण के पक्ष में है या विरोध में। वैश्वीकरण का समर्थन और कांग्रेस का विरोध एक साथ नहीं चल सकता। इस संघी पाखण्ड से देश और खासकर यह सूबा पहले से सावधान है। उन्होंने कहा कि यह मोर्चा सूबे की मूर्तिबाज सरकार और केंद्र की महंगी सरकार के खिलाफ अपनी लड़ाई को जारी रखेगा। राष्ट्रीय लोकदल का बढ़ता जनाधार इस बात का गवाह है कि किसान अब अपनी उपेक्षा सहन नहीं करेगा। चैधरी चरण सिंह ने जिस प्रकार किसानों के सवालों को मुखरित किया था, आज वही प्रयास किसानों को प्रेरित कर रहा है कि वह अपने हक और हकूक की लड़ाई लड़ें।


- न्यूज डेस्क

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