आप क्यों मरना चाहते हैं किसान जी?

पंजाब के किसान अपनी संपन्नता के लिए जाने जाते हैं पर किसान खुदकुशी भी कर हैं, आखिर क्यों? केंद्र सरकार के गले कर्ज के कारण तीन हजार आत्महत्याओं की बात नहीं उतरती तो स्थानीय प्रशासन एफआईआर में खुदकुशी का कारण नशे से लेकर घरेलू कलह तक साबित करने की कोशिश में लग जाता है। पर अब वस्तुस्थिति पता करने केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय के अधीन इंडियन काउंसिल आफ सोशल साइंस रिसर्च (आईसीएसएसआर) के सौजन्य से अपनी तरह का पहला प्रोजेक्ट शुरू किया जा रहा है। इसमें प्रदेश के 18 जिलों का सर्वेक्षण कर किसानों और कृषि मजदूरों के उस वर्ग का पता लगाया जाएगा जो खुदकुशी का रास्ता चुन सकते हैं। इससे पहले इस बात के तो अध्ययन होते रहे हैं कि वे कौन से कारण थे जिनकी वजह से खुदकुशी की गई। लेकिन खुदकुशी की कगार पर कौन खड़ा है अथवा कौन कर सकता है, इसका पता करने का प्रयास कभी नहीं किया गया है। पंजाबी विश्वविद्यालय पटियाला के बठिंडा स्थित क्षेत्रीय केंद्र के अर्थशास्त्र विभाग के प्रोफेसर केसर सिंह भंगू ने इस संबंध में ... बताया कि एक जिले में करीब 500 लोगों का चार चरणों में अलग-अलग साक्षात्कार किया जाएगा। इसमें खुदकुशी कर चुके किसान व खेत मजदूर के पीडिघ्त परिवार और वैसे ही हालात से जूझ रहे परिवार के एक-एक सदस्य से मिला जाएगा। ऐसे परिवारों का पता लगाने के लिए पहले चरण में एक सर्वे भी किया जाएगा। जिन गांवों में किसानों ने आत्महत्याएं की हैं उन्हीं गांवों के किसानों से भी साक्षात्कार किया जाएगा। ऐसे लोगों की मजबूरी, इच्छाएं और उम्मीदों का भी पता लगाया जाएगा। रिपोर्ट आने में साल भर का समय लग सकता है। अध्ययन में कर्ज के अलावा सामाजिक पहलुओं, पारिवारिक दबाव और ड्रग्स को भी अलग से रखा गया है। प्रोफसर भंगू के अनुसार इस अध्ययन से भविष्य में बनने वाली नीतियों की रूपरेखा भी तय करने में मदद मिलेगी। मानव संसाधन विकास मंत्रालय का यह प्रयास तनाव भरे हालात से किसानों को निकालने के लिए है। याद रहे कि आईसीएसएसआर के पास ऐसे प्रस्ताव भेजे जाने से पहले पायलट प्रोजेक्ट के रूप में सबसे अधिक प्रभावित होने वाले संगरूर के लहरा, भवानीगढ़ और अंदाना ब्लाक में ऐसा ही सर्वेक्षण किया गया है। इन क्षेत्रों में सबसे अधिक संख्या में किसान व खेत मजदूरों ने आत्महत्याएं की हैं। पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला के अर्थशास्त्र विभाग के प्रो. लखविंदर सिंह, यूनिवर्सिटी के बठिंडा स्थित क्षेत्रीय केंद्र के अर्थशास्त्र विभाग के प्रो. केसर सिंह भंगू को सबसे अधिक आत्महत्याओं वाली मालवा यानी काटन बेल्ट के तीन जिलों संगरूर, बठिंडा व मानसा में अध्ययन करने का जिम्मा सौंपा गया है। आईसीएसएसआर ने ऐसे ही दो और प्रोजेक्ट पंजाब एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी लुधियाना और श्री गुरुनानक देव यूनिवर्सिटी अमृतसर को भी क्रमशः दोआबा व माझा क्षेत्रों के लिए दिए हैं।

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