उत्तर प्रदेश में कानून-राज, माया सरकार की बड़ी उपलब्धि

मायावती सरकार के तीन साल पूरे हुए। बंदूकें चमकाने, दादागिरी दिखाने का दौर खत्म हो चुका है। दलित-वंचितों की इज्जत अब सरेआम नीलाम नहीं होगी। चारो-ओर अमन-चैन है। पुलिसिया जुल्म की कहानी अब प्रदेश में कम सुनाई पड़ती है। दलितों के इस दुर्ग में सेंध लगाने की हर कोशिश नाकाम हो रही है। विपक्षी पार्टियां मंुह बाये खड़ी है कि कब माया- सरकार जामुन की तरह टपके। मायावती की निर्भयता से शोषित वंचितों के बीच सुरक्षा बांध बढ़ा है। उपर्युक्त बातें दलित और पिछड़ी जमात की अगुवाई करने वाले हरिनयन सिंह ने कहीं। श्री सिंह ने आगे कहा कि केन्द्रीय सरकार उत्तर प्रदेश के साथ पक्षपात कर रही है। सरकार को विफल करने के लिए समय पर राज्य का अपना हक देने में केन्द्र आनाकानी कर रहा है। साज-सज्जा, रंग-रोंगन पर खर्च कहां हुआ? समाज के पैसे से लालकिला बने, चार मीनार बने, अरबों के मंदिर बने। इतिहास गवाह है कि देश का धन उत्पादन प्रक्रिया में लगाने के बजाय मुगल-गार्डन बनाने में लगाये। देश के राजे-रजवाड़े और मठाधीशों ने क्या-क्या गुल नहीं खिलाये अतीत में। बाबा साहेब अम्बेडकर स्मारक का विरोध करने वाले वर्ग का चेहरा बेनकाव हो चुका है। दलित अपने स्वाभिमान की लड़ाई को जारी रखेगा। उसे रोटी भी चाहिऐ और इज्जत भी। अगड़े-पिछड़े के बीच भाईचारा हो पर ‘भाई’ वह बने और ‘चारा’ हम बनें, यह खेल कबतक चलेगा। श्री सिंह ने आगे कहा कि हमने सदियों का शासन मांगा पर हमारे तीन साल की सत्ता को बर्दाश्त करने की स्थिति में नहीं है। जिन पाटियों के आजादी के बाद शासन अपने पास रखा और देश को बेच डाला, जबाब तो उसको देना है। देश को बहुराष्ट्रीय निगमों के हाथों नीलाम करने वाली पार्टी को कौन नहीं जानता है। उन्होंने कहा कि मायावती की सत्ता न केवल यूपी में बहाल रहेगी बल्कि अन्य प्रान्तों में भी सांगठनिक फैलाव होगा।


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