गडकरी गायब, कौन संभाले गांडीव ?

भाजपा के मुखिया नितिन गडकरी लम्बी छुट्टी पर विदेश गये हुए हैं। विदेश में छुट्टी भी मनेगी और सीख भी लेंगे। तकनीकी क्षेत्र में और ऊर्जा के क्षेत्र में दुनिया में क्या-क्या प्रयोग हो रहे हैं, गडकरी उनसे सीखेंगे। उनकी सीख भारत के लिए कितनी उपयोगी होगी यह तो वक्त बतायेगा। भारत के प्रमुख विपक्षी पार्टी भाजपा के मुखिया जो ठहरे। आडवाणी युग का अंत हो चुका है। ‘पीएम इन पाइप लाइन’ के उदेश्‍य पूरे नहीं हुए। इससे ना केवल आडवाणी का सपना टूटा बल्कि पार्टी में उनके वर्चस्व का ढांचा भी ढह गया। अब है नितिन का नूतन युग। पर भाजपाई नितिन के इस नूतन युग से काफी निराश हैं। लालू और मुलायम के प्रति अपमानजनक टिप्पणी को लेकर भाजपा की भद्द पिट गई। गडकरी ने लालू और मुलायम को कांग्रेस का कुत्ता कहा था जिस पर उन्हें माफी मांगनी पड़ी। मुलायम ने तो उन्हें माफ कर दिया पर लालू ने नितिन को कान पकड़ने की कह डाली। भाजपा की छवि बहुत ही शालीन रही है। मर्यादित आचरण और व्यवहार की बात प्रतिनिधि रही है। वाजपेयी, आडवाणी और अन्य कनिष्‍ठ नेता और कार्यकर्र्तायो ने भाषा को लेकर अपनी पहचान बनाये रखी, पर गडकरी ने सब गोबर कर दिया। नितिन के नौसिखियेपन से पार्टी नाहक परेशान हो रही है। अब नेता दबी जुबां से संघ को कोस रहे हैं। देश में नक्सलवाद, जाति आधारित जनगणना, झारखंड में सत्ता समीकरण आदि महत्वपूर्ण परिवर्तन के दौड़ में देश फंसा है और ये विदेश में हैं। पार्टी में जिन-जिन लोगों को जिम्मेवारी दी गई है उन्हें कोई काम ही नहीं है। खासे बेरोजगार बैठे हैं। गडकरी की अनुपस्थिति में अनन्त कुमार का कद काफी बढ़ गया है। अहम फैसलों में भी किसी की सहमत नहीं ले रहे हैं। एक ओर राहुल और सोनिया गांधी लगातार दौरा कर रहे हैं। दलित-वंचितों की भागीदारी पर बयान दे रहे हैं, दूसरी ओर नितिन गडकरी ने जिन-जिनको सूबेदारी सौंपी है, उनकी समाज में कोई अहमियत नहीं है। ये सभी सामंती चेहरे हैं। चाहे वह सी.पी ठाकुर, प्रभात झा, सूर्यप्रताप साही हो, पार्टी का चेहरा बिल्कुल ही सवर्णवादी है। विजयेन्द्र गुप्ता को दिल्ली का अध्यक्ष बनाया, इससे पुरानी ब्राह्मण-बनियों की पार्टी की छवि बरकरार तो रही पर दलित-वंचित और पिछड़ा आज भी पार्टी से दूर-दूर है। पार्टी लीडर परेशान है इस छवि से। पार्टी लीडर पार्टी को जनाधार वाली पार्टी बनाना चाहते हैं, पर नये ऩिजाम ने पार्टी के लिए जो इंतजाम किया है, उससे जनाधार बढ़ने की बजाय लगातार घटा ही है। पार्टी वर्तमान नेतृत्व से निराश है।


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