बदनाम गलियों से निकले बच्चे..


एक सैक्स-वर्कर के रूप में सुनन्दा ने अपनी जिंदगी में बहुत मेहनत की। गरीबी में शोषण का शिकार हुई। लेकिन आज 45 साल के बाद वो खुश है, क्योंकि उसका बेटा आस्टेलिया में एमबीए की पढा़ई कर रहा है।
मालती जो एक सेक्स-वर्कर के साथ एक 22 साल की लड़की की मां भी है, उसकी बेटी कम्प्यूटर में मास्टर डिग्री कर रही है। 47 साल की मालती इस आशा में है कि उसकी बेटी को अच्छी नौकरी मिले ताकि वो देह व्यापार हमेशा के लिए छोड़ दे।
सुनन्दा और मालती के बच्चों ने एक मुकाम हासिल किया है जो उनके लिए गर्व की बात है।
सिर्फ यही सैक्स वर्कर्स नहीं हैं जो अपने बच्चों को शिक्षा दिलाना अपना अधिकार समझती हैं बल्कि ऐसी और मांएं भी हैं, जो इस देह व्यापार से जुड़े होने के बाद भी अपने बच्चे को उच्च शिक्षा देने की ख्वाहिश रखती हैं। 126 सैक्स वर्कर्स के बच्चे अहमदाबाद के स्कूलों में पढ रहे हैं, जिनमें से 85 प्रतिशत स्कूल विद्यार्थी है और 15 प्रतिशत स्कूल पास कर चुके हैं। इनमें से लगभग 14 प्रतिशत बच्चे अंग्रेजी स्कूलों में पढते हैं। इनमें से कुछ सैक्स वर्कर्स ऐसी हैं जो अपनी कमाई के पैसे उनके ट्यूशन की पढाई में लगाती है और कुछ ऐसी है जो उन्हें अच्छी शिक्षा के लिए विदेश भी भेजती हैं। इनमें से एक सैक्स वर्कर का कहना है कि बड़ा बेटा लंदन में नौकरी करता है और एम. काम की परीक्षा देने के लिए आया है जबकि छोटा बेटा माडलिंग में रुचि रखता है, पर वह चाहती हैं कि पहले वह अपनी पढ़ाई पर ध्यान दे। कितनी ही ऐसी सैक्स वर्कर्स हैं, जिनके लिये समाज में कोई जगह नहीं है, फिर भी उन्होंने अपने बच्चों को कामयाब होते हुए देखा है । 100 में से 40 ऐसी औरतें हैं जो शिक्षित होने के बावजूद भी देह व्यापार में आई। जिनमें से कुछ नर्स, अध्यापिका , काल सेन्टर कर्मचारी और सैल्फ गर्ल हैं जो कम मजदूरी मिलने और शारीरिक शोषण और मानसिक शोषण के कारण देह व्यापार से में उतरने को मजबूर हुई।
इनके बच्चे अपनी मां के पेशे को लेकर शर्म महसूस नहीं करते और उनकी मजबूरी को समझते हैं। वे जानते हैं कि किन हालातों में उन्हें यह कदम उठाना पड़ा और अब किस तरह इस व्यापार ने उन्हें जकड़ लिया है कि वह चाह कर भी इससे बाहर नहीं निकल सकतीं। इनके बच्चे जानते हैं कि उनकी मां ने कितनी मुश्किलों का सामना करके उन्हें इस मुकाम पर पहुंचाया है। खुद कष्ट सह कर इन्हें सुख दिया और उनके जीवन को खुशहाल बनाया है।


- Shahnaz Ansari



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