सृष्टि विनाश की ओर.. क्या माया सभ्यता की भविष्यवाणी सत्य होगी?


दुनिया खत्म हो जाएगी, फिर से सृष्टि का निर्माण होगा, शुरू से जीव-जन्तु पनपेंगे... और भी न जाने क्या-क्या ?? यह मेरा कहना नहीं है, बल्कि पिछले दिनों कई समाचार चैनल पृथ्वी के खत्म होने की बात करने में लगे थे। कहा जा रहा है कि 21 दिसम्बर 2012 से समस्त पृथ्वी का विनाश होगा। घोर तबाही होगी, प्रलय होगा। यह कोई हम आप की बुद्धि से उभरने वाला भय मात्र नहीं। बल्कि जानकारों का मानना भी है कि जितनी बार भी पृथ्वी का निर्माण हुआ है। उनमें से अभी तक की होने वाली खोजों मे 2012 से आगे की तिथि के कोई अवशेष नहीं मिले हैं तथा माया सभ्यता कैलेंडर इसी तिथि को ही आकर समाप्त हुआ है। माना जाता है कि अब से पहले तीन बार पृथ्वी का निर्माण हो चुका है और हर बार इसी तारीख को पृथ्वी का अंतिम समय था।
क्या यह सच है ? अथवा कुछ अवषेश न मिलने के कारण आगे के समय के बारे में अनुमान लगाया गया है। पृथ्वी की उम्र कितनी हो चुकी है इस सवाल पर वैज्ञानिक कभी एक मत तो नहीं हुए लेकिन वर्तमान दौर में तकनीकी विकास ने दुनिया के अंत की अटकलें लगाने में सहूलियत जरूर पैदा कर दी हैं। एक ब्रिटिश सॉफ्टवेयर जो कि ‘वेब-बॉट’ के नाम से जाना जाता है, का आकलन है कि 21 दिसम्बर 2012 इस दुनिया का अंतिम दिन होगा या विश्व में इस दिन कोई घनघोर तबाही होगी जैसा अभी तक के इतिहास में नहीं हुआ। इस तारीख तक पृथ्वी का चुम्बकीय क्षेत्र पूरी तरह बदल जाएगा जो जीवन के अस्तित्व के लिए खतरा होगा। कुछ खोजकर्ता इस बात का दावा कर रहे हैं कि माया सभ्यता के कैलेंडर में इस बात का जिक्र है कि पृथ्वी का विनाश हो जाएगा, लेकिन विनाश कब होगा इसका कोई निश्चित आकलन नहीं है। विनाश अगर होगा भी तो अचानक नहीं। विनाश की प्रक्रिया धीरे-धीरे होती है, जैसे पहले हुई थी। जब से पृथ्वी बनी हैं, विनाश के कई चरण हुए हैं, कई प्रजातियां विलुप्त हुई तथा नई आई हैं। भूगर्भीय साक्ष्य भी पृथ्वी पर कई प्राचीन विनाशकारी हलचल को दर्शाते हैं। चाहे वे भूकम्प के रूप में हो या ज्वालामुखी के रूप में या ग्लोबल वार्मिंग या हिमयुग के रूप में।
एक विचारणीय पहलू यह भी है कि विश्व के सभी धर्मो में जल को ही महाप्रलय का कारण माना गया है। इसी क्रम में दो महाद्वीपों का नाम उभर कर आता है जो आज महासागर के नीचे है। इनका नाम है ‘‘लेमुरिया एवं मु’’। विश्व के खोजकर्ताओं का दावा है कि इन दोनों महाद्वीपों की सभ्यता काफी विकसित थी। प्रश्न ये है कि अगर यह दोनों महाद्वीप विकसित थे, तो ये समुद्र में कैसे समा गए ? क्या समुद्र के बढ़ते जलस्तर ने इनको अपने अन्दर समा लिया या किसी भूगर्भीय हलचल के चलते यह महासागर के अन्दर चले गए। सवाल यह है कि अगर पृथ्वी का ताममान यूं ही बढ़ता रहा तो आने वाले समय में कोई दूसरी ‘‘लेमुरिया या मु’’ जैसी घटना होने से कैसे इंकार किया जा सकता है ?
यदि ‘वेब-बॉट’ की बात की जाए तो 1990 में वेब बॉट का खासतौर पर शेयर बाजार की भविष्यवाणी करने के लिए विकास किया गया था। जिसने 2001 में वशिंगटन डीटी मे आई महामारी की भी चिन्ता जताई थी, 2004 में हुए भूकंप, 2009 में अमेरिका मे आए कैटरीना तूफान की भविष्यवाणी भी की थी, ये घटनाएं घटित भी हुई। अब सोचना यह है कि क्या 21 दिसम्बर 2012 की कहानी भी सच होगी?
यदि बाईबल की ओर नजर की जाए तो उसमें यह लिखा गया है कि कोई बड़ा प्रलय निश्चित है, लेकिन किसी भी तरह की तिथि की बात नहीं की गई है।
अब तो समाचार चैनलों के साथ-साथ डिस्कवरी चैनल और हिस्ट्री चैनल जैसे चैनल भी पूरी तरह से खुल कर जनता को डरा रहे हैं। हो सकता है यह विश्व को सतर्क करने की पहल हो, परंतु ऐसी भी सर्तकता क्या जो किसी के मन मे भय ही बैठा जाए ? मैंने जब यह सुना कि 2012 में पृथ्वी नष्ट हो जाएगी, तो मन मे विचार आया, अब पढ़ने का क्या फायदा ? छोड़ो, दो साल बाद तो मरना ही है। मुझ जैसे ऐसे कितने ही लोग होंगे जिन्हें भय ने ऐसा सोचने पर मजबूर कर दिया होगा। लेकिन फिर भी जिन्दगी धड़ल्ले से चल रही है। जनता को आकर्षक खबरों का बड़ा शौक होता है। इसी के चलते जो नहीं भी है उसे भी बढ़ाचढ़ा कर प्रस्तुत किया जाता है। हद तो तब होती है जब समाधान न बताकर यह कहा जाए कि अब कुछ नहीं किया जा सकता। पृथ्वी का विनाश और जीवन का अंत निश्चित है। और अब तो इस विषय को लेकर ‘2012’ के नाम से एक हॉलिवुड फिल्म भी आ गई है। फिल्म के बाद से यह विषय और भी अधिक चर्चा में है।
हमने स्कूल, कॉलेज में पढ़ा है कि प्रकृति के साथ छेड़छाड़ करने से वह रुष्ट हो जाएगी और सर्वनाश होगा। क्या हमने सोचा है कि यह 2012 की कहानी क्यों गढ़ी जा रही है ? इन सभी बातों के पीछे क्या कारण है ? इसका जवाब यह है कि हम बिना सोचे समझे प्राकृतिक संसाधनों को बरबाद कर रहे हैं, उसके प्रतिकूल व्यवहार का प्रदर्शन कर रहे हैं। प्लास्टिक बैग्स का प्रयोग, रसायनों का अत्यधिक उपयोग, कूड़ा फेंकना, प्रगति के नाम पर वनों का विनाश करना, खूब शोर मचाना, पूजा पाठ के नाम पर नदियों को गन्दा करना, ये सब हमारी गलतियां हैं। क्या कभी सोचा है कि वह सब कूड़ा जिसे हम कहीं भी फैंक आते हैं, वह कहां जाता होगा ? क्या वह नष्ट होगा ? या कहीं जाकर इकट्ठा हो जाएगा ? जिससे धरती की गोद बंजर होगी या पानी का प्रवाह रूकेगा। गन्दे रसायन जो फैक्ट्रीयों से निकलते हैं वह नदियों के स्तर पर जाकर इकट्ठा होते हैं और जल के जीव-जन्तुओं को सांस लेने में परेशानी होती है। सूर्य की किरणें उन तक नहीं पहुंच पाती। क्या यह सब दोष हमारा नहीं है, जो ये पृथ्वी का अंतिम समय नजदीक बताया जा रहा है। हम प्रकृति से छेड़छाड़ कर रहे हैं। यह सब वो आम बातें हैं जो हर जगह कही जाती हैं, लेकिन अगले ही पल, सभी चेतावनियां भूल कर हम वही भूल दोहराते हैं, जो खतरनाक है। विनाश तो होगा ही। ग्लेशियर पिघल रहे हैं। सर्दी समय से नहीं बढ़ती। वर्षा ऋतु समय से नहीं आती । गर्मी के प्रकोप से जंगल जल रहे हैं। मछलियां अपने आप मर रहीं है, किनारे ढेरों मछलियां बहकर लग जाती हैं। साफ पानी पीने को नहीं है, हम बेधड़क ए.सी, फ्रिज का प्रयोग कर रहे हैं। रोज न जाने कितनी गाड़ियों, फैक्ट्रीयों से निकले धुएं प्रकृति पर गहरा असर छोड़ रहे हैं। ओजोन परत में छिद्र बढ़ता जा रहा है। रोज़ बैठकें होती हैं। इतने सारे एनजीओ सुधार कार्य में लगे हैं। कोपनहेगन में भी लड़ने मरने के अलावा कुछ नहीं हुआ। हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं, लेकिन हमारा हाल वही है। हम अब भी यही सोचते हैं कि मैं ही क्यूं करूं ? सब गन्दगी फैला रहे हैं, तो एक मेरे प्रयास से क्या होगा ? हमें शायद यह मालूम नहीं कि हमारी देखा-देखी ही दूसरे भी करेंगे और दो से चार लोग साथ आयेंगे, जिससे यह गिनती बढ़ती जाएगी। नहीं तो फिर वही होगा, फिर कोई नया चैनल तोड़-मरोड़ कर कुछ नया पेश करेगा और हम एक दूसरे पर उंगलियां उठाते रह जायेंगे। लेकिन यहां यह बात बताने वाली है कि 2012 में होने वाला विनाश जो शायद हम रोक भी सकते हैं, हमारे ही कारण स्वरूप लेगा। कहा जाता है कि ड्रैगन्स, जो कई करोड़ वर्षों तक पृथ्वी पर रहे, मानव जाति उसके पलक झपकाने जितने समय तक भी पृथ्वी का साथ नहीं दे पाई। इतने कम समय में मनुष्य ने पृथ्वी को सबसे ज्यादा प्रभावित किया है।
सवाल माया सभ्यता की आहट से आतंकित होने या न होने से नहीं है, सवाल है मानवीय सभ्यता के उतावलेपन का। यह उतावलापन अनियंत्रित उपभोग का है। उपनिषद की यह पंक्ति ‘‘त्येन त्यक्तेन भुंजीथाः’’ यानी ‘त्याग पूर्वक भोग करो’ के जीवन-सूत्र को हम भुला बैठे हैं। असीमित भोग की चाहत से कुदरत की बनाई यह खूबसूरत दुनिया जिस तरह से तबाह हो रही है, वह सब हम लोग सिर्फ सुन ही नहीं रहे हैं, बल्कि प्रत्यक्ष भोग भी रहे हैं। दुनिया के वैज्ञानिक लगातार चिन्ता जाहिर कर रहे हैं कि धरती के बढ़ते तापमान से यह दुनिया धरती में समा जाएगी। बांग्लादेश के तटवर्ती इलाकों के निवासियों का पलायन अभी से ही शुरू हो गया है। भय इस कदर से व्याप्त है कि लोग ऊंचे टीलों की तलाश अभी से करने लग गए हंै। सुनामी, का झटका हम झेल चुके हैं। दुनिया के निज़ामों के पास इस धरती को बचा लेने का कोई इंतजाम शेष नहीं है। तमाम संधियों और कोपनहेगन के बकवास का परिणाम हमारे सामने है। संसार की सियासत जिस बेलगाम उपभोक्तावाद के आगोश में समाई हुई है, वह सबके सामने है। परिणामोत्पादक पहल का इंतजार बेसब्री से किया जा रहा है। इस आलोक में माया सभ्यता की आशंकाओं पर अविश्वास भी कैसे किया जा सकता है ?


Suman Kumari


Nirman Samvad

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34 comments:

Anonymous said...

yes dear
mere ko b aisa hi lagta h japan me b bura haal h waha pr perlya aa rahi h or ho skta h ki usi uncontrol radiation k karan dhrti pr se jivan khtm ho jaye
by amit yadav
katopuri rewari
9813040433
9466350136

creativedesignway said...

aisa kuch nahi hain ye sab afwah hain, manta hun mayan calender ke bawiswani sahi hain but maya sabhayata ke logo ko parlay ka date pata nahi wo ganitiye hisab se anuman lagaye hain kisi ko pata nahi ki earth ki age kitni hain..........

Anonymous said...

waqt kehta hai main fir na ayunga, teri ankhon ko fir na rulaunga, jeena hai to is pal jee le, main kal tak na ruk payunga.

kanpur. 9335774784

Anonymous said...

ye sach hai... ye duniya friday ko bani thi aur friday ko hi sabkuch khatam ho jayega... 21Dec2012 friday hai...

Hemant said...

परलय आ भी गयी तोह क्या ??? ये शारीर नाशवान है हरेक चीज़ नाशवान है सुच एक ही है जिसकी चेतना अपने अंदर है परलय का दिन मुनष्य जाती के लिए सबसे उत्तम दिन होगा उस दिन हरेक को मोक्ष मेलेगा , धरती तोह फिर अपने अप्प को विकसित कर लेगी और जीवन चकर दुबारा चलेगा ..................

Manish said...

बेहतरीन तरीके से लिखा है आपने!! खासकर अन्तिम के मानव से जुड़े पहलुओं को... सच ही है जब तक हम खुद पर नियंत्रण नहीं करेंगे तब तक विनाश की तलवार हमेशा सिर पर लटकी रहेगी. यह धूम्रपान जैसा विषैला आचरण है.
विनाश तय है लेकिन विनाश को नजदीक लाना मूर्खता ही है.

rajendra said...

Yeh such hai ki jindagi ka maut se gahra rista hai, but is tarah k baato ko logon tak pahuchaker vaigyaniko ne galat kiya hai coz. sabhi ke mun me der peda ho gaya hai, manaki perlaya hoga lekin kab hoga koi janta nahi koi GOD nahi hai na he koi uska doot jo her kisi ko mrityu ka din bataye, Plz. don't fare to the death. always be happy but peryawran ko saaf rakhe aur iswer me mun lagaye....RAJENDRA sidharth nagar
email

AMIT KUMAR LAKHER said...

SACH KAHA HAI MANAV HI ANT ME MANAV JATI KE VINAS KA KARAN BANEGA
AMIT KUMAR LAKHER MANENDRAGARH

OM said...

JEEVAN KA ANT,MANAV JATI KA ANT, DHARTI KA ANT,
YE SAB SUN KAR KITNA AJEEB LAGTA HAI KI HAM SABHI KE ANT KI DATE 21 DEC.2012 KO MAAN RAHE HAI JABKI HAM SABHI KO DIL SE PATA HAI KI AISA KUCH NAHI HOGA
OM FROM HARYANA
OM.COOL11@GMAIL.COM

KUMAR ASHISH said...

LOG JO KAHTE HAI WO SACH NAHI HOTA DUNIYA KA ANT KABHI NA HUA THA NA HOGA JIVAN ME PARIWARTN HI SANSAR KA NIYAM HAI BUS KUCH SAMYE KE LIYE YE APNE SAPNO ME KHO JAYEGA AUR JAB JAGEGA TO EK NAYA SAWERA HOGA NAI JIVAN HOGA NAI UMID NAYA PARAKRITIK ANUBAH HOGA SAB KHUCH PHIR SE WAHI AAJYEGA JHA THA AATMA NA MARTI HAI N PAIDA HOTI HAI YAH BUS INSAN KA SARIR BADALTI HAI DUNIYA KA SABSE ACHA DIN HOGA JAB SIRISTI KA VINASH HO GA US SAMYE N KOI AMIR RAHEGA N KOI GARIB SAB INSAN HO GE SAB EK SAMAN HOGE AUR SAMNE JANAT HOGI WELCOME TO JANAT

Nagender Mishra said...

Is Duniya ka ant Aaj se phele Kab hua tha ye apko (KRISNA STORY - MATSYA AVATAR) Dekh kar pata chal jayega aur jab bhi es duniya ka ant hoga to es siristi ko bchane ke leiye Shri Naryan Bhagwan Fir se aayege aur es Manav Jati ka Marg Darshan keregye.ye jo time chal reha hai ye Naye Yug ke Nirman ka es time Shri Hari ji apne bagato ko ek taraf aur Papi insano ko ek taraf kar rehe hai jab Paapiyo ki Ginti adhik jo jayegi tab es Dharti ka fir se Nirman Hoga.aur Hamare Maha Purhso ka Kahna hai ki Bhagwan Shri Narayan Ji ka Janam Ho Chuka Hai. ab to Ghosna Baki hai ki.

Anonymous said...

hello Dear,
aisa kuch nahi hai aaj ka din hai aur vo bhi din aane waala hai jab parlyee aane waali hai

tum bhi yahi ho aur mai bhi yhi hu dekhte hi kon se parlyee aati hai

chahye mai rahu ya na rahu lakin mere dosto batana jaruru ki kya hua mai uper jaa kar bhi w8 karuga kya hua 21b sadi ka

Best Regards,
by Balam,Jatin,Ambikesh
Abhimanyu Thakur

Phone 8587004010

Anonymous said...

hello friends,
dosto maut to ek din aani hi aani hai phir hum is pralay se kyu dare jab tak god hamare sath hai hame darne ki koi baat nahi wo kabhi ek sath apne bachho ka balidan nahi le sakta.jo haga achha hi hoga.god bless u.Ambike+s chaturvedi

Anonymous said...

ek din jab mout aani h to kyon darna. maje se raho

Preet Kaushal said...

daro mat dosto kuch bhi nahi hoga. mujhe pura viswas hai jesus christ per . if any question just miss call me 0033662883739 FROM PARIS.

ganeshyadav said...

LOG JO KAHTE HAI WO SACH NAHI HOTA DUNIYA KA ANT KABHI NA HUA THA NA HOGA JIVAN ME PARIWARTN HI SANSAR KA NIYAM HAI BUS KUCH SAMYE KE LIYE YE APNE SAPNO ME KHO JAYEGA AUR JAB JAGEGA TO EK NAYA SAWERA HOGA NAI JIVAN HOGA NAI UMID NAYA PARAKRITIK ANUBAH HOGA SAB KHUCH PHIR SE WAHI AAJYEGA JHA THA AATMA NA MARTI HAI N PAIDA HOTI HAI YAH BUS INSAN KA SARIR BADALTI HAI DUNIYA KA SABSE ACHA DIN HOGA JAB SIRISTI KA VINASH HO GA US SAMYE N KOI AMIR RAHEGA N KOI GARIB SAB INSAN HO GE SAB EK SAMAN HOGE AUR SAMNE JANAT HOGI
(GANESH YADAV)

Anonymous said...

duniya ka ant itni asani se nahi hoga bandhuo, chinta mt kro apne krmo me lage raho, 22 december ko hm phr se yahi cmnt kr rahe honge aur is note ka majak uda rahe honge......jai shreee raam.

Pavan Kumar said...

darne ki koi bat nahi h esha kuch bhi nahi hoga duniya ka nash hoga to manushy ke karn me pavan kumar from etawah

sumit verma said...

yaro duniya khatm ho ya na ho esse kya matlab marna to vaise bhi hai maut s etna darte q ho अगर दुनिया खत्म होनी तो होगी ही प्रलय होगी तो बच तो paoge nhi so apna jo kaam kaj hai karte raho en afwaho se daro mat

Thotiya dharmendar (sastary) said...

likha huva shac he ? Dunia badale gy mera mane dharma he me gujrt she hu meri umr 21 me shastary hu No End erth only scen hare

manoj meghwal said...

Duniya ek hasin tohfa he hamare liye aur bhagwan kya hamare is tohfe ko khatm hone denge .nahi dosto esa nhi hoga god jarur hamari madad karenge agar esa huaa to. Agar esa hota to hum manvo ko pata chalega kya bilkul nahi .hum aur bhavisyawani karne wale log he to ek saman keval manusya na ki bhagwan .ye sab hamare hath me nhi h. Afwah ki bhi koi sima nhi hoti jaise hamare gar ki koi bat chupae na chupati wese hi ye bat bhi puri tarah se fal gayi h. Me udaipur rajasthan ka rahne wala hu aur hamare yaha ke itihas ke anusar pritvi ka vinas abhi bahut dur h isme abhi bahut samay baki h. Jab bhagwan shri hari krishna ko ek choti ladki ne keval char din ka samay diya tha ki abi me choti hu aap char din bad aana tab prabhu ne kaha ye char din nhi ye char yug he me aaunga .hamare yaha ka itihas satvik he jo hamare yaha ke logo ko darne se to bachata he .aaj bhi dungarpur jile me bane is dham par bhagwan gode par sawar h . Manyata h ki gode ka panv jamin par lagega to vinash hoga. Par abhi tak panv do ungle dur he usme kai saal lagenge dosto drna nhi ye to ek khof he jo hame dara raha he. Me to in bhavisyawani krne wale logo par bilkul bi viswas nhi karta. Aap bhi mat kijiye aur apne parivar ko sambhale ok bye.
From :manoj kumar meghwal (udaipur. raj.)
9950091981

Janardan Singh said...

GOOD SIR GI JANARDAN SINGH RAJPOOT 9694410705

Janardan Singh said...

The world will end, will build the universe again, starting from the creatures - animals Panpenge ... And do not let - What? I do not say it, but the last days many news channels began to speak of the end of the earth. That being said, December 21, 2012 will be the destruction of the entire earth. Gross destruction, would flood.

Anonymous said...

aap sab dunia katm hone ke bare me jyda mat soho kuki jeb dunia katm hogi to hum me se koi nahi bahega esliye tensn na lo

Vinay yadav said...

are yaro santi se jio aur jine do kuchh nahi hone wala

azad said...

DSFGKFDF,VCPOIVC,DGFKIHLBF][PTFYOHLOHLRTOPYLB,N LBMNLHKBPLHGPLB N

Lalit Khandelwal said...

Duniya ka vinash to hai magar koi date nahi hai

BRAR said...

RAT GAYE SOKA,DIN GAYA KHAYAE>HIRA JASA JANAM HA KAUDI BADLE JAYA <>BRAR(LEADER BJP)-SAWAR DUT-09837040741

Bk Prabhakar said...

he dosto jo bhi chez janmti hai to aant bhi hai
aagar aap ko janna ho ki ye duniya ka ant kaise hoga?????? or
bhagwan ka awtarn kai se hota hai ?????
or ye srsti ka chakr kai se chalta hai ?, to sampark kare.
bkprbhkr9@gmail.com

dhanesh kumar said...

ठीक लिखा है/

mohan medawat said...

ak hi maha shakti he jo srasti ke har jive me vidhaman he.....jise ham aatma kahte he jo parmatma swroop he....aatma hi ajar amar avinashi he.....or dharm hi dharti ko vinash se bacha sakta he....dharm ka matlab mandiro ya dharmik asthlo me jakar puja prathna karm kaand karna nahi he.....dharm ka matlab prakti or parmatma ke niymo ka palan karna hi dharm he....

Prajapti Prakash said...

Ved padho usme sub kutch hay.idhar udhar mat jao.Jo sacchai hay usko apnao.parmeshwer sub kuch janta hay.

Prajapti Prakash said...

Ved padho usme sub kutch hay.idhar udhar mat jao.Jo sacchai hay usko apnao.parmeshwer sub kuch janta hay.

Rafeek Md said...

srasthi ka vinas to hoga lekin dosto isme darne ki kya baat hai.meri umra 25 saal ki hai aur saayad mai 30-35 saal aur jee lunga .ham aapko bata dena chahte hai ki maut se vahi darte hai jinke paas paisa adhik hai .doto mai aapko bata du jo gareebo ko nahi samajhta vah insan hone ke layak nahi.mai ek baar sadak par apne dost se baate kar raha tha aur tabhi maine dekha ek choti si ladki jiske phate purane kapde the vah kuch logo sekuch khaane ko maang rahi thi.jab us ladki ne ek se maanga to vah aadmi sigret jalakar peene laga aur us ldki ko dutkarne laga.vaha par samose mil rahe the kya vah aadmi 10 upaye kisigret pee sakta kya vah aadmi 5 rupaye ka samosa us ladki ko nahi khila sakta tha.kya yah hai bharat ki sabhyata jab log apne aap ko bhool jaate hai tab hoti hai maha pralay. jab log yah bhool jate hai ki mai insaan nahi bhagvaan hoo tab hoti hai maha pralay .dosto jis tarah prathvi ka taapmaan badh raha hai isse anumaan lagaya ja sakta hai ki maha pralay nikat hai aur rahi narayan hari vishnu bhagvaan ki baat to vah to har jagah hai kan kan me hai.rahi is sansar ki gandgi ki baat to manusya hai to gandgi to hogi hi bhagvaan ne insaan ko itna achha nahi banaya ki vah gandgi na kare yah to insaan ka swabhav hai.aur aisa kuch bhi nahi banaya gaya jiska ant na ho .ek na ek din mujhe marna hai aur aap ko bhi .aur is prithvi ko bhi.
vishesh- maha pralay se dare nahi vo to hogi hi. present ka dekho future ka nahi pralay bhagvaan nahi kar raha hai pralay ham tum jasi log kar rahe hai. are tum log pralay se darte ho pralay to har wakt insaan ke saath rahti hai insaan ne aise aise naseele padarth banaye hai jo log sauk se kaate peete hai aur sarkar unko chalati hai jaise gutkha sigret tambaku daru smaik aur bhai nassele jo mai bhi nahi jaanta.are mere bhaiyo inko roko pralay saayad kam ho jaaye. thnk you mai hu rafeek from up

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